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उदया तिथि: त्योहार और व्रत में कौन-सी तिथि मानी जाती है?

अधिकांश व्रत सूर्योदय की तिथि से चलते हैं, पर प्रदोष, संकष्टी, शिवरात्रि, गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी अलग समय से तय होते हैं। जानिए नियम।

जब दिन के बीच में तिथि बदल जाए, तो त्योहार किस दिन मनाया जाए? इसका उत्तर कर्मकाल के सिद्धांत में है: हर अनुष्ठान का एक निर्धारित समय होता है, और उसी समय तिथि का होना आवश्यक है।

उदया तिथि: सामान्य नियम

उदय का अर्थ है उगना। उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो, और अधिकतर कामों के लिए वही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है। यदि सूर्योदय के समय नवमी है, तो दिन नवमी ही कहलाएगा, भले ही एक घंटे बाद दशमी शुरू हो जाए।

उदया तिथि का उपयोग इनके लिए होता है:

  • एकादशी व्रत (स्मार्त परंपरा)
  • पंचांग में पूर्णिमा और अमावस्या
  • अधिकांश मासिक व्रत और दिन का नाम
  • कई संस्कारों के लिए शुभ दिन चुनना

सूर्योदय हर स्थान पर अलग होता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में उदया तिथि भिन्न हो सकती है। अपने शहर का पंचांग देखें।

जब कोई और समय निर्णायक हो

व्रत / त्योहार तिथि किस समय तिथि होनी चाहिए
प्रदोष व्रत त्रयोदशी प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास)
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण चतुर्थी चंद्रोदय
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी चंद्रोदय
गणेश / विनायक चतुर्थी शुक्ल चतुर्थी मध्याह्न
राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी मध्याह्न
कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी निशीथ (मध्यरात्रि), रोहिणी नक्षत्र हो तो उत्तम
महाशिवरात्रि / मासिक शिवरात्रि कृष्ण चतुर्दशी निशीथ (मध्यरात्रि)
दीपावली लक्ष्मी पूजा अमावस्या प्रदोष काल
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा प्रदोष काल, भद्रा रहित
श्राद्ध पितृ तिथि अपराह्न

प्रदोष

भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद के संध्याकाल में होती है। इसलिए प्रदोष व्रत उस दिन रखा जाता है जब सूर्यास्त के समय त्रयोदशी हो, भले ही वह उसी दोपहर शुरू हुई हो। प्रदोष व्रत की तिथियाँ देखें।

संकष्टी चतुर्थी

व्रत चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है, इसलिए चंद्रोदय के समय चतुर्थी होनी चाहिए। इसी कारण संकष्टी कभी-कभी उदया चतुर्थी से एक दिन पहले पड़ती है। संकष्टी चतुर्थी की तिथियाँ देखें।

शिवरात्रि और जन्माष्टमी

दोनों रात्रि के पर्व हैं (स्पिरिचुअल मार्ग पर महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी के बारे में पढ़ें)। शिवरात्रि के लिए निशीथ काल में चतुर्दशी आवश्यक है, जो स्थानीय मध्यरात्रि के आसपास रात का आठवाँ मुहूर्त है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में मनाया जाता है, इसलिए निशीथ में अष्टमी निर्णायक है, और रोहिणी नक्षत्र का योग विशेष शुभ माना जाता है।

यदि तिथि दोनों दिन हो, या किसी दिन न हो?

हर त्योहार के लिए निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु और क्षेत्रीय ग्रंथ नियम देते हैं:

  • दोनों दिन: कुछ त्योहारों में पहला दिन (पूर्वविद्धा) और कुछ में दूसरा दिन (परविद्धा) लिया जाता है। एकादशी में स्मार्त पहला दिन और वैष्णव प्रायः दूसरा दिन मानते हैं।
  • किसी दिन नहीं (क्षय तिथि): त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब तिथि आवश्यक काल को अधिक छूती हो, या जिस दिन वह तिथि पड़ती हो।

सारांश

  • दिन का नाम उदया तिथि (सूर्योदय की तिथि) से तय होता है।
  • कई अनुष्ठानों का कर्मकाल अलग है: सूर्यास्त, चंद्रोदय, मध्याह्न या मध्यरात्रि।
  • त्योहार उस दिन होता है जब उस समय तिथि विद्यमान हो।
  • हमारे व्रत पृष्ठ आपके स्थान के लिए ये नियम अपने-आप लागू करते हैं।

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