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अमावस्या: महत्व, पितृ तर्पण और अमावस्या के दिन क्या करें

अमावस्या पितरों का दिन क्यों है, तर्पण कैसे करें, मौनी, सोमवती और महालया जैसी विशेष अमावस्याएँ, और परंपरा किन कामों से बचने को कहती है।

अमांत पंचांग में हर चंद्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है। इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, क्योंकि वह आकाश में सूर्य के साथ होता है। परंपरा इस अंधेरी रात को पितृलोक का द्वार मानती है, इसलिए तर्पण और श्राद्ध के लिए यह सबसे प्रमुख दिन है। अपने शहर के लिए अगली अमावस्या की तारीख देखें।

खगोलीय पक्ष

अमावस्या 30वीं तिथि है, जब चंद्र-सूर्य का अंतर 348° से 360° होता है। वास्तविक अमावस्या (युति) अमावस्या तिथि के अंत में होती है। उसके अगले ही क्षण शुक्ल प्रतिपदा और नया चंद्र मास शुरू होता है।

अमावस्या पितरों के लिए क्यों

गरुड़ पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार पितर चंद्रमा के दूसरी ओर निवास करते हैं। अमावस्या पर जब वह भाग सूर्य की ओर होता है, तब वे अर्पण को सबसे अधिक ग्रहण करते हैं। उनके नाम से तिल मिला जल अर्पित करना, जिसे तर्पण कहते हैं, उन्हें तृप्त करता है और परिवार को आशीर्वाद दिलाता है, ऐसी मान्यता है।

घर पर सरल तर्पण

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पितरों की दिशा, दक्षिण की ओर मुख करें।
  3. ताँबे के पात्र में जल, काले तिल, कुशा और थोड़ा दूध लें।
  4. दाहिनी हथेली के पितृ तीर्थ (अंगूठे और तर्जनी के बीच) से जल अर्पित करते हुए पिता, पितामह और प्रपितामह के नाम लें, या केवल "मेरे सभी पितरों को" कहें।
  5. गाय, कौए, कुत्ते या किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ और अन्न का दान करें।

पूर्ण श्राद्ध के लिए परिवार प्रायः पुरोहित को बुलाते हैं। वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय पितृ पक्ष है, जो महालया अमावस्या पर समाप्त होता है।

विशेष अमावस्याएँ

  • महालया अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या): पितृ पक्ष का समापन; सभी पितरों का श्राद्ध, उनका भी जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो।
  • दीपावली अमावस्या: लक्ष्मी पूजा की रात। स्पिरिचुअल मार्ग पर दीपावली और लक्ष्मी जी की आरती देखें।
  • मौनी अमावस्या (माघ): मौन रहकर पवित्र स्नान, विशेषकर प्रयागराज में।
  • सोमवती अमावस्या: सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या; विवाहित महिलाएँ पीपल की परिक्रमा करती हैं।
  • शनि अमावस्या: शनिवार की अमावस्या, शनि शांति के उपायों के लिए प्रभावी मानी जाती है।
  • हरियाली अमावस्या (श्रावण): वृक्षारोपण और प्रकृति पूजा।

परंपरा किनसे बचने को कहती है

अमावस्या विवाह, गृह प्रवेश, नए उद्यम या बड़ी खरीदारी के लिए नहीं चुनी जाती। कई परिवार बाल और नाखून नहीं काटते, और कुछ रात की यात्रा टालते हैं। ये सबके लिए नियम नहीं, रीतियाँ हैं; अपने परिवार की परंपरा मानें।

अमावस्या और मास का नाम

उत्तर भारत में दीपावली से पहले की अमावस्या "कार्तिक अमावस्या" कहलाती है, जबकि अमांत पंचांग में वही रात "आश्विन अमावस्या" है। तारीख एक ही है। कारण अमांत और पूर्णिमांत में समझें।

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