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प्रदोष व्रत: विधि, समय और वार के अनुसार सात प्रकार

भगवान शिव का प्रदोष व्रत कैसे रखें, यह सूर्यास्त से क्यों जुड़ा है, सोम, भौम और शनि प्रदोष का अर्थ, और तारीख कैसे तय होती है।

प्रदोष व्रत महीने में दो बार त्रयोदशी (13वीं तिथि) को भगवान शिव और माता पार्वती के लिए रखा जाता है। इसकी विशेषता इसका समय है: पूजा प्रदोष काल में होती है, यानी सूर्यास्त के आसपास का संध्याकाल। आगामी प्रदोष व्रत की तारीखें देखें।

सूर्यास्त ही क्यों?

स्कंद पुराण के अनुसार त्रयोदशी की संध्या को भगवान शिव कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता दर्शन के लिए एकत्र होते हैं। उस समय की गई प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है, ऐसी मान्यता है। इसलिए व्रत उस दिन होता है जब सूर्यास्त के समय त्रयोदशी तिथि हो, भले ही वह उसी दोपहर शुरू हुई हो। इसी कारण प्रदोष कभी-कभी सूर्योदय की तिथि से एक दिन पहले पड़ता है। हमारा कैलेंडर यह नियम अपने-आप लागू करता है; ऐसे नियमों के बारे में उदया तिथि और त्योहारों का समय में पढ़ें।

वार के अनुसार प्रदोष

वार नाम परंपरा से किस कामना के लिए
रविवार रवि प्रदोष आरोग्य और दीर्घायु
सोमवार सोम प्रदोष मनोकामना पूर्ति; विशेष शुभ माना जाता है
मंगलवार भौम प्रदोष ऋण और रोग से मुक्ति
बुधवार बुध प्रदोष विद्या और बुद्धि
गुरुवार गुरु प्रदोष बाधाओं पर विजय और पितरों का आशीर्वाद
शुक्रवार शुक्र प्रदोष दांपत्य सुख और समृद्धि
शनिवार शनि प्रदोष शनि पीड़ा से मुक्ति; संतान की कामना

विधि: व्रत कैसे रखें

  1. सुबह: स्नान करके व्रत का संकल्प लें। कई लोग दिन भर फल और दूध पर रहते हैं।
  2. सूर्यास्त से पहले: दोबारा स्नान करें और ईशान कोण की ओर पूजा स्थान तैयार करें।
  3. प्रदोष काल में (सूर्यास्त के आसपास लगभग डेढ़ घंटा): शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें; बेलपत्र, सफेद फूल, भस्म और दीपक अर्पित करें।
  4. ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें; गिनती के लिए नाम जप काउंटर उपयोगी है। और शिव मंत्र स्पिरिचुअल मार्ग पर पढ़ें।
  5. कथा पढ़ें और शिव जी की आरती से समापन करें।
  6. पूजा के बाद, या पारिवारिक परंपरा के अनुसार अगली सुबह व्रत खोलें।

प्रदोष और शिवरात्रि

प्रदोष त्रयोदशी को होता है, और अगली रात चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है। फाल्गुन (पूर्णिमांत) में वही चतुर्दशी महाशिवरात्रि है। कई भक्त दोनों रखते हैं, जिससे शिव की दो दिन की उपासना हो जाती है। मासिक शिवरात्रि की तारीखें देखें।

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