तिथि क्या है? हिंदू चांद्र दिवस की गणना कैसे होती है
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे निकलता है। जानें तिथि की गणना कैसे होती है, इसकी अवधि क्यों बदलती है और यह हर त्योहार को कैसे तय करती है।
पूजा, गृह प्रवेश या व्रत की योजना बनाते समय पहला प्रश्न यही होता है: आज कौन सी तिथि है? तिथि हिंदू पंचांग की धड़कन है। त्योहार, व्रत, श्राद्ध और मुहूर्त सब इसी पर निर्भर हैं। फिर भी कम लोग जानते हैं कि तिथि वास्तव में क्या मापती है और यह दिन के बीच में क्यों बदल जाती है।
संक्षिप्त उत्तर
तिथि एक चांद्र दिवस है। यह वह समय है जिसमें पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे निकल जाता है।
अमावस्या को सूर्य और चंद्रमा एक ही भोगांश पर होते हैं। हर दिन तेज़ चलने वाला चंद्रमा आगे बढ़ता है। 12° आगे होने पर पहली तिथि (शुक्ल प्रतिपदा) समाप्त होती है, 24° पर दूसरी, और इसी तरह आगे। 180° के बाद पूर्णिमा आती है, और 360° पर चंद्रमा फिर सूर्य के साथ आ जाता है, जिससे चांद्र मास पूरा होता है।
360 ÷ 12 = 30, इसलिए हर चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
शुक्ल और कृष्ण पक्ष
| पक्ष | चंद्रमा | तिथियाँ | अंत |
|---|---|---|---|
| शुक्ल पक्ष | बढ़ता हुआ | प्रतिपदा से चतुर्दशी, फिर पूर्णिमा | पूर्ण चंद्र |
| कृष्ण पक्ष | घटता हुआ | प्रतिपदा से चतुर्दशी, फिर अमावस्या | नव चंद्र |
इस प्रकार "कृष्ण एकादशी" का अर्थ है घटते पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, जब चंद्रमा सूर्य से 300° से 312° आगे होता है।
तिथि 24 घंटे की क्यों नहीं होती
तिथि कोण से तय होती है, घड़ी से नहीं। चंद्रमा की कक्षा अंडाकार है, इसलिए उसकी गति बदलती रहती है। पृथ्वी के पास (उपभू) वह दिन में 15° से अधिक चलता है, दूर (अपभू) होने पर 12° से कम। सूर्य की आभासी गति भी वर्ष भर थोड़ी बदलती है।
इसलिए एक तिथि लगभग 19 घंटे 59 मिनट से 26 घंटे 47 मिनट तक की होती है। इसी से पंचांग की अधिकांश उलझनें समझ आती हैं:
- तिथि किसी भी समय शुरू हो सकती है, जैसे दोपहर 3:47 बजे।
- एक दिन में अक्सर दो तिथियाँ होती हैं।
- कभी कोई छोटी तिथि दो सूर्योदयों के बीच शुरू और समाप्त हो जाती है (क्षय तिथि)।
- कोई लंबी तिथि दो सूर्योदयों तक रहकर लगातार दो दिन आ सकती है (वृद्धि तिथि)।
इन स्थितियों को हमने एक दिन में दो तिथियाँ क्यों? में विस्तार से समझाया है।
दिन की तिथि: उदया तिथि
अधिकांश कार्यों के लिए सूर्योदय के समय जो तिथि हो, वही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है। इसे उदया तिथि कहते हैं। यदि सूर्योदय पर दशमी है और एकादशी सुबह 10 बजे शुरू होती है, तो पंचांग में वह दिन दशमी ही गिना जाएगा।
सूर्योदय स्थान पर निर्भर करता है, इसलिए मुंबई और कोलकाता में, और अक्सर भारत व अमेरिका में, एक ही दिन की तिथि अलग हो सकती है। हमेशा अपने शहर का पंचांग देखें।
कुछ व्रत अलग समय से तय होते हैं: प्रदोष के लिए सूर्यास्त, संकष्टी चतुर्थी के लिए चंद्रोदय और महाशिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि। पढ़ें: उदया तिथि और व्रत के नियम।
क्या तिथि पूरी दुनिया में एक जैसी है?
हाँ और नहीं। तिथि के आरंभ का क्षण पूरी दुनिया के लिए एक ही है, क्योंकि यह केवल सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर है। पर स्थानीय घड़ियाँ अलग हैं। नई दिल्ली में रात 11:30 बजे शुरू होने वाली तिथि न्यूयॉर्क में उसी दिन दोपहर 1:00 बजे शुरू होती है। अलग सूर्योदय के साथ मिलकर, किसी त्योहार की तारीख देशों के बीच सचमुच अलग हो सकती है।
तिथियों के पाँच वर्ग
परंपरा हर पक्ष की तिथियों को पाँच गुणों के चक्र में बाँटती है:
- नंदा (आनंद): प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी
- भद्रा (शुभ): द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी
- जया (विजय): तृतीया, अष्टमी, त्रयोदशी
- रिक्ता (खाली): चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी
- पूर्णा (पूर्ण): पंचमी, दशमी, पूर्णिमा या अमावस्या
विवाह और गृह प्रवेश जैसे आरंभ के लिए रिक्ता तिथियाँ प्रायः टाली जाती हैं। हर तिथि के अधिपति देवता भी हैं; सभी तीस के लिए संपूर्ण तिथि ज्ञान देखें। तिथियों से जुड़े देवताओं के बारे में स्पिरिचुअल मार्ग पर देवी-देवता अनुभाग में विस्तार से पढ़ें।
हम तिथि की गणना कैसे करते हैं
इस साइट पर सूर्य और चंद्रमा की दृश्य स्थिति आधुनिक खगोलीय गणना से निकाली जाती है, और हर 12° सीमा पार होने का सटीक सेकंड गणितीय रूप से खोजा जाता है। प्रमुख डिजिटल पंचांग भी यही पद्धति अपनाते हैं, इसलिए आप आज की तिथि के आरंभ और समाप्ति समय पर भरोसा कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- तिथि चंद्र-सूर्य के बीच 12° का अंतर है; एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
- तिथि लगभग 20 से 27 घंटे की होती है, इसलिए किसी भी समय शुरू हो सकती है।
- स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि अधिकांश कर्मों के लिए दिन की तिथि है।
- स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए हमेशा अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग देखें।