तिथि 12 व 27 · भद्रा तिथि

द्वादशी

द्वादशी के अधिपति श्रीहरि विष्णु हैं। यह पारण का दिन है, जब एकादशी व्रत खोला जाता है। यह भद्रा तिथि शुभ और धार्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त है।

अर्थ: द्वादश (बारहवीं)। अधिपति देवता: Vishnu (Hari)।

अगली द्वादशी तिथियाँ

  • कृष्ण पक्ष द्वादशी: गुरु, 5 नव॰ 2026, 10:36 AM → शुक्र, 6 नव॰ 2026, 10:31 AM
  • शुक्ल पक्ष द्वादशी: शनि, 21 नव॰ 2026, 06:32 AM → रवि, 22 नव॰ 2026, 04:57 AM
  • कृष्ण पक्ष द्वादशी: शुक्र, 4 दिस॰ 2026, 11:45 PM → रवि, 6 दिस॰ 2026, 12:52 AM
  • शुक्ल पक्ष द्वादशी: रवि, 20 दिस॰ 2026, 08:15 PM → सोम, 21 दिस॰ 2026, 05:37 PM

समय भारतीय मानक समय (IST) में। स्थानीय समय और व्रत की तिथि के लिए अपना शहर देखें।

द्वादशी का महत्व

पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले करना चाहिए, और हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में नहीं।

कई परंपराओं में कार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी विवाह होता है, यानी तुलसी और शालिग्राम का विवाह।

वामन द्वादशी और गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) भी इसी तिथि को आती हैं।

किन कार्यों के लिए शुभ

  • एकादशी व्रत का पारण
  • धार्मिक अनुष्ठान
  • ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को भोजन

परंपरागत रूप से वर्जित

  • द्वादशी समाप्ति के बाद तक पारण टालना

द्वादशी के त्योहार

  • तुलसी विवाह
  • वामन द्वादशी
  • गोवत्स द्वादशी

पूजा के लिए पढ़ें: विष्णु जी की आरती (स्पिरिचुअल मार्ग पर)