तिथि 3 व 18 · जया तिथि

तृतीया

तृतीया की अधिष्ठात्री देवी गौरी (पार्वती) हैं। यह जया (विजयदायिनी) तिथि है और स्त्रियों के व्रतों तथा स्थायी खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ है।

अर्थ: तृतीय (तीसरी)। अधिपति देवता: Gauri।

अगली तृतीया तिथियाँ

  • शुक्ल पक्ष तृतीया: बुध, 11 नव॰ 2026, 03:54 PM → गुरु, 12 नव॰ 2026, 06:10 PM
  • कृष्ण पक्ष तृतीया: गुरु, 26 नव॰ 2026, 01:16 PM → शुक्र, 27 नव॰ 2026, 09:49 AM
  • शुक्ल पक्ष तृतीया: शुक्र, 11 दिस॰ 2026, 11:23 AM → शनि, 12 दिस॰ 2026, 02:07 PM
  • कृष्ण पक्ष तृतीया: शुक्र, 25 दिस॰ 2026, 11:26 PM → शनि, 26 दिस॰ 2026, 08:05 PM

समय भारतीय मानक समय (IST) में। स्थानीय समय और व्रत की तिथि के लिए अपना शहर देखें।

तृतीया का महत्व

वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया है, जो इतनी शुभ है कि अलग मुहूर्त की आवश्यकता नहीं; इस दिन शुरू किया गया कार्य 'अक्षय' होता है।

हरतालिका तीज, हरियाली तीज और कजरी तीज जैसे सुहागिनों के प्रमुख व्रत तृतीया को आते हैं।

चैत्र शुक्ल तृतीया को राजस्थान में गणगौर मनाई जाती है, जो 18 दिन की गौरी पूजा का समापन है।

किन कार्यों के लिए शुभ

  • सोना और संपत्ति खरीदना
  • विवाह संबंधी कार्य
  • शिक्षा या कला का आरंभ
  • गौरी और शिव की पूजा

परंपरागत रूप से वर्जित

  • कुछ विशेष निषेध नहीं; यह सामान्यतः शुभ है

तृतीया के त्योहार

पूजा के लिए पढ़ें: दुर्गा जी की आरती (स्पिरिचुअल मार्ग पर)