प्रतिपदा का महत्व
इसके अधिपति देवता अग्नि हैं, इसलिए यह नए कार्यों के आरंभ और हवन के लिए स्वाभाविक दिन है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष (गुड़ी पड़वा, उगादि, चेटी चंड) शुरू होता है और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि आरंभ होती है।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और बलि प्रतिपदा मनाई जाती है।
किन कार्यों के लिए शुभ
- नया कार्य या अध्ययन शुरू करना
- हवन और अग्नि अनुष्ठान
- शुक्ल पक्ष में गृह प्रवेश
- पक्ष के लिए संकल्प लेना
परंपरागत रूप से वर्जित
- कृष्ण प्रतिपदा को सामान्यतः बड़े नए कार्यों के लिए नहीं चुना जाता
प्रतिपदा के त्योहार
- गुड़ी पड़वा / उगादि
- नवरात्रि घटस्थापना
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज की पूर्व संध्या (कार्तिक)
पूजा के लिए पढ़ें: दुर्गा जी की आरती (स्पिरिचुअल मार्ग पर)